नई दिल्ली. क्या बीते 72 घंटों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ईमानदार, जनता के हित में सोचने वाले नेता की गढ़ी हुई छवि को नुकसान
पहुंचा है? क्या दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों पर कार्रवाई की मांग करते
हुए दो दिनों तक धरने पर बैठने की वजह से 'ब्रैंड केजरीवाल' को झटका लगा
है? इन सवालों के जवाब देने मुश्किल हैं। लेकिन वैकल्पिक राजनीति का दावा
करने वाली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनकी राजनीति को रोल मॉडल के रूप में देखते रहे कई लोग अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सोशल मीडिया, मीडिया और सार्वजनिक बहसों में कई लोग जो 'केजरीवाल छाप'
राजनीति के समर्थक रहे हैं, अब खुद को निराश बता रहे हैं। केजरीवाल से
लोगों को बहुत उम्मीदें रही हैं। लेकिन जिस तरह से वे 'पॉलिटिक्स' करते दिख
रहे हैं तो उनमें और अन्य पार्टियों को नेताओं में फर्क तेजी से कम होता
दिखने लगा है। केजरीवाल अपनी बातों से पलट कर यू-टर्न ले रहे हैं। शायद यही वजह है कि लोग उनसे नाराज होने लगे हैं।

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