नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप)
ने पिछले साल 8 दिसंबर से लेकर अब तक एक महीने से ज्यादा के वक्त में
राष्ट्रीय स्तर पर जितनी सुर्खियां बटोरी हैं, उतनी अहमियत देश की किसी नई
पार्टी को शायद कभी नहीं मिली। 8 दिसंबर को घोषित नतीजों के मुताबिक 'आप'
ने दिल्ली विधानसभा में 28 सीटें जीतीं और कांग्रेस के समर्थन से सरकार
बनाई। कॉरपोरेट जगत, राजनीति, समाज सेवा में सक्रिय मशहूर लोगों से लेकर मीडिया की हस्तियां 'आप'
में शामिल हो रही हैं। 10 जनवरी से आम आदमी पार्टी 'मैं हूं आम आदमी' नाम
से एक अभियान भी शुरू कर चुकी है, जिसके तहत देश भर में सदस्य बनाने का
कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि बड़ी तादाद में लोग
उससे जुड़ेंगे। जानकार बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर
बड़ी ताकत बनने की ओर बढ़ चली है। देश के शहरी और अर्द्ध शहरी इलाकों में
'आप' के असर से कोई इनकार नहीं कर सकता है। सर्वे भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।
लेकिन क्या आप वाकई ऐसी राजनीति कर रही है जो जाति, धर्म और भ्रष्टाचार से
मुक्त है? क्या आप देश के राजनीतिक संस्कार को बदल रही है? और अगर ऐसा है
तो यह कैसे हो रहा है? इस बात को समझने के लिए आम आदमी पार्टी की खूबी और
खामी जानना जरूरी है।

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