नई दिल्ली. अपने वजूद में आने के महज 14 महीनों में दिल्ली
विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने अपना सिक्का जमा दिया है। देश
के राजनीतिक इतिहास में बहुत कम ऐसी पार्टियां हैं, जिन्हें अपने पहले
चुनाव में ऐसी सफलता हासिल हुई है। 'आप' ने दिल्ली विधानसभा में 28 सीटें
जीती हैं। खास बात यह है कि 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने
दिल्ली की राजनीति की दिग्गज मानी जाने वालीं शीला दीक्षित के शासन का अंत
उन्हें उनकी ही सीट पर हरा कर किया है। इस जीत से न सिर्फ दिल्ली की
राजनीति में संदेश गया है बल्कि इससे देश के कई लोगों को एक खास किस्म की वैकल्पिक राजनीति की आहट सुनाई दी है। आप के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि 'आप' के नेता और मशहूर 'मंचीय' कवि कुमार विश्वास कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को
अमेठी से चुनाव लड़कर उन्हें हराने की चुनौती दे रहे हैं। विश्वास का कहना
है कि अगर अमेठी के लोग और उनकी पार्टी चाहेगी तो वे जरूर अमेठी जाकर
कांग्रेस के उपाध्यक्ष को चुनौती देंगे। हालांकि, यह अलग बात है कि
सत्यव्रत चतुर्वेदी और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे कांग्रेसी नेता विश्वास का
मखौल उड़ा रहे हैं।
लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि 'आप' को
हल्के में लेना न सिर्फ कांग्रेस को बल्कि बीजेपी, सपा और बीएसपी जैसी
पार्टियों को भी भारी पड़ सकता है। बड़े नेताओं को चुनौती देना और उन्हें
हराने की रणनीति में आप अब तक सफल रही है। आप के उम्मीदवारों ने दिल्ली की
राजनीति के दिग्गज समझे जाने वाले चार कांग्रेसी मंत्रियों को मात दी है।
अब तक मिले रेस्पॉन्स को देखते हुए आप बड़े नेताओं को चुनौती देने की
रणनीति आगे भी जारी रख सकती है।

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